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रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान
बन्द ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया ..
,
उसके मुॅंह में एक थैली थी, जिसमें सामान की
लिस्ट और पैसे थे ...
,
दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस
थैली में भर दिया ...
,
कुत्ते ने थैली मुॅंह मे उठा ली और चला गया ...
,
दुकानदार आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे
पीछे गया ये देखने की इतने समझदार
कुत्ते का मालिक कौन है ....
,
कुत्ता बस स्टाॅप पर खडा रहा, थोडी देर बाद
एक बस आई जिसमें
चढ गया ..
,
कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे
कर दी, उस के गले के बेल्ट में पैसे और
उसका पता भी था ..
,
कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के
बेल्ट मे रख दिया ..
,
अपना स्टाॅप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे
चला गया और पूॅंछ हिलाकर कंडक्टर
को इशारा कर दिया
और बस के रुकते ही उतरकर चल दिया ...
,
दुकानदार भी पीछे पीछे चल रहा था ...
,
कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरोंसे
२-३ बार खटखटाया ...
,
अन्दर से उसका मालिक आया और लाठी से
उसकी पिटाई कर दी ..
,
दुकानदार ने मालिक से इसका कारण पूछा .. ??
,
मालिक बोला .. "साले ने मेरी नींद खराब कर दी,
चाबी साथ लेके नहीं जा सकता था गधा"
,
,
,
,
जीवन की भी यही सच्चाई है ..
,
आपसे लोगों की अपेक्षाओं का
कोई अन्त नहीं है ..
,
जहाँ आप चूके वहीं पर लोग बुराई निकाल लेते हैं और पिछली सारी अच्छाईयों को भूल जाते हैं ..
,
इसलिए अपने कर्म करते चलो, लोग
आपसे कभी संतुष्ट नहीं होएँगे।।
,
अगर दिल को छुआ हो तो शेयर जरूर कीजियेगा 👍

🌻 Chhoti si fish🐟 ne Apni Maa se Poocha : *Hum Paani mein kyon rehte hai, zameen pe kyon nahi rehte ?*

Mummy Fish sweetly replied: *Hum Fish hai isliye Paani mein rehte hain, _Zameen par to sab "selfish" rehte hain !!!_*

🌻 Death asked Life :
*Why does everyone love you and hate me?*
Life replied :
*Because I am a beautiful Lie and you are  painful Truth.!*

🌻 A Lovely Logic for a beautiful Life::
*Never try to maintain relations in your life, _Just try to maintain life in your relations._*

🌻 3 stages of Life:
Teen Age:: *Has time & energy – But no Money.*
Working Age:: *Has Money & Energy – But No Time.*
Old Age:: *Has Money & Time – But No Energy.*

🌻 *We are very good Lawyers for our mistakes, _and very good Judges for other's mistakes._*

🌻 U always say – Find good people and leave bad ones.
But I say, *_Find the good in people and ignore the bad in them._ Because no one is born perfect.!*

🌻 A fantastic sentence written on every Japanese bus stop::
Only buses will stop here – *Not your time, _So Keep walking_🌹

*Story of the day* – कछुआ और खरगोश – वो कहानी जो आपने नहीं सुनी…

आपने कछुए और खरगोश की कहानी ज़रूर सुनी होगी, *just to remind you;* short में यहाँ बता देता हूँ:

एक बार खरगोश को अपनी तेज चाल पर घमंड हो गया  और वो जो मिलता उसे रेस लगाने के लिए *challenge* करता रहता।

कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली।

रेस हुई। खरगोश तेजी से भागा और काफी आगे जाने पर पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया, उसने मन ही मन सोचा कछुए को तो यहाँ तक आने में बहुत समय लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं, और वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। लेटे-लेटे  कब उसकी आँख लग गयी पता ही नहीं चला।

उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा। बहुत देर बाद जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ फिनिशिंग लाइन तक पहुँचने वाला था। खरगोश तेजी से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ रेस जीत गया।

*Moral of the story: Slow and steady wins the race.* धीमा और लगातार चलने वाला रेस जीतता है।

ये कहानी तो हम सब जानते हैं, अब आगे की कहानी देखते हैं:

रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो जाता है, वो अपनी हार पर चिंतन करता है और उसे समझ आता है कि वो *overconfident* होने के कारण ये रेस हार गया…उसे अपनी मंजिल तक पहुँच कर ही रुकना चाहिए था।

अगले दिन वो फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती देता है। कछुआ पहली रेस जीत कर आत्मविश्वाश से भरा होता है और तुरंत मान जाता है।

रेस होती है, इस बार खरगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता जाता है, और कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हराता है।

*Moral of the story: Fast and consistent will always beat the slow and steady.*  तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है।

यानि *slow and steady* होना अच्छा है लेकिन *fast and consistent*   होना और भी अच्छा है।

कहानी अभी बाकी है जी….

इस बार कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे ये बात समझ आती है कि जिस तरह से अभी रेस हो रही है वो कभी-भी इसे जीत नहीं सकता।

वो एक बार फिर खरगोश को एक नयी रेस के लिए चैलेंज करता है, पर इस बार वो रेस का रूट अपने मुताबिक रखने को कहता है। खरगोश तैयार हो जाता है।

रेस शुरू होती है। खरगोश तेजी से तय स्थान की और भागता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार नदी बह रही होती है, बेचारे खरगोश को वहीँ रुकना पड़ता है। कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ वहां पहुँचता है, आराम से नदी पार करता है और लक्ष्य तक पहुँच कर रेस जीत जाता है।

*Moral of the story: Know your core competencies and work accordingly to succeed.* पहले अपनी *strengths* को जानो और उसके मुताबिक काम करो जीत ज़रुर मिलेगी.

कहानी अभी भी बाकी है जी …..

इतनी रेस करने के बाद अब कछुआ और खरगोश अच्छे  दोस्त बन गए थे और एक दुसरे की ताकत और कमजोरी समझने लगे थे। दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दुसरे का साथ दें तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं।

इसलिए दोनों ने आखिरी रेस एक बार फिर से मिलकर दौड़ने का फैसला किया, पर इस बार *as a competitor* नहीं बल्कि *as a team* काम करने का निश्चय लिया।

दोनों स्टार्टिंग लाइन पे खड़े हो गए…. *get set go* …. और तुरंत ही खरगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेजी से दौड़ने लगा। दोनों जल्द ही नदी के किनारे पहुँच गए। अब कछुए की बारी थी, कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए। अब एक बार फिर खरगोश कछुए को उठा फिनिशिंग लाइन की ओर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर रिकॉर्ड टाइम में रेस पूरी कर ली। दोनों बहुत ही खुश और संतुष्ट थे, आज से पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी।

*Moral of the story: Team Work is always better than individual performance.*  टीम वर्क हमेशा व्यक्तिगत प्रदर्शन से बेहतर होता है।

*Individually* चाहे आप जितने बड़े *performer* हों लेकिन अकेले दम पर हर मैच नहीं जीता सकते।

अगर लगातार जीतना है तो आपको टीम में काम करना सीखना होगा, आपको अपनी काबिलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा। और जब जैसी *situation* हो, उसके हिसाब से टीम की *strengths* को *use* करना होगा।

एक बार एक आलू ने
भिंड़ी को
फोन करके कहा -
I Love U..!
,
भिंड़ी को आया बहुत
गुस्सा ,
उसने आलू को बहुत
खरी खोटी सुनायी..!!
,
बोली -
तुम इतने मोटे और
सस्ते ,
मैं इतनी स्लिम
और सेक्सी..!!
,
आलू का तो बस दिल
ही टूट गया..!
तब से फिर
उसने इतनी सब्ज़ियाँ
पटाने की
ठानी..!
आप देख सकते हो..!
,
आलू - गोबी
आलू - बेंगन
आलू - शिमला मिर्ची
आलू - पालक
आलू - मटर
आलू- गाजर
आलू - छोले
आलू - मेथी
,
और
भिंड़ी उस दिन से आज भी अकेली है..!
,
# Moral - जो attitude दिखाती
है ,
वोह हमेशा
अकेली रह जाती है..!

Dosti ka Rishta

एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा
बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया। प्रेम
भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में
सुलाता।

कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही
करते।

एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक
गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक
ही फल लगा था।

बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को
अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े
किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा
फकीर को दिया।

फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला,
'बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक
टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल
गया।

फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग
लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा
लिए।

जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने
कहा, 'यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा
हूं।

मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं
करते।' और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख
लिया।

मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह
कड़वा था।
राजा बोला,
'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?

'
उस फकीर का उत्तर था,
'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक
कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?

सब टुकड़े इसलिए
लेता गया ताकि आपको पता न चले।

दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो, आओ
कुछ ऐसे रिश्ते रचे...

कुछ हमसे सीखें , कुछ हमे
सिखाएं..

            👏🏻🙏👏🏻

" स्वाभिमान " और " अभिमान "

ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी
एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया
वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं।
अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।
किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी।
जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।
सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया....
अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।
जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।
ध्यान रखे
आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि ,
आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा
कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा
कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे...
ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।
सकारात्मक रहे
सकारात्मक जिए...
बहुत सुन्दर सन्देश
इंसान के अंदर जो समा जायें वो
" स्वाभिमान "
और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो
" अभिमान "
: समझदार व्यक्ति वह नहीं जो ईट का जवाब पत्थर से दे ।
समझदार व्यक्ति वो हैं जो फेंकी हुई ईट से अपना, आशियाना बना ले..

खुशियां बांटने से बढ़ेंगी ही

एक डलिया में संतरे बेचती बूढ़ी
औरत से एक युवाअक्सर संतरे खरीदता ।
'
अक्सर, खरीदे संतरों से एक संतरा
निकाल उसकी एक फाँक चखता
और कहता, "ये कम मीठा लग रहा है, देखो !"
'
बूढ़ी औरत संतरे को चखती और
प्रतिवाद करती "ना बाबू मीठा तो है!"
'
वो उस संतरे को वही छोड़,
बाकी संतरे ले गर्दन झटकते
आगे बढ़ जाता।
'
युवा अक्सर अपनी पत्नी के साथ होता था।
एक दिन पत्नी नें पूछा
"ये संतरे तो हमेशा मीठे ही होते हैं,
फिर यह नौटंकी तुम हमेशा
क्यों करते हो ?"
'
युवा ने पत्नी को एक मघुर
मुस्कान के साथ बताया
"वो बूढ़ी माँ संतरे बहुत मीठे बेचती है,
पर खुद कभी नहीं खाती,
इस तरह उसे मै संतरे खिला देता हूँ ।
'
उसके संतरे भी बिकते है और
उसमें से अंततः एकाद उसे भी
खाना नसीब हो जाता है।
और नुक्सान भी नहीं होगा।
'
बुढ़िया के पड़ोस में बैठी सब्जीवाली
भी रोज का यह माज़रा देखती।
.
एक दिन, बूढ़ी माँ से उस सब्जी बेचनें
वाली औरत ने सवाल किया,
ये झक्की लड़का संतरे लेते इतना
चख चख करता है,
रोज संतरों में नुस्ख निकालता है,
तुझे भी चखाता है।
पर संतरे तौलते समय मै तेरे
पलड़े देखती हूँ, तू हमेशा
उसकी चखने की झक्की में,
उसे ज्यादा संतरे तौल देती है ।
ऐसे लड़के के पीछे क्यों अपना
नुक्सान करती हो?
''
तब बूढ़ी माँ नें साथ सब्जी बेचने
वाली से कहा
"उसका चखना संतरे के लिए नहीं,
मुझे संतरा खिलानें को लेकर होता है।
,
बस इतना ही है की वो समझता है
में उसकी यह बात समझती नही।
लेकिन मै बस उसका प्रेम देखती हूँ,
पलड़ो पर संतरे तो अपने
आप बढ़ जाते हैं ।
,
विस्वास कीजिये कभी कभी जीवन
का आनंद इन्हीं छोटी छोटी
बातों में आता है।
,
पैसे नहीं दूसरों के प्रति प्रेम
और आदर ही जीवन में मिठास
घोलता है।
देने में जो सुख है वह
छीनने-पाने में नहीं।
खुशियां बांटने से बढ़ेंगी ही; नुक्सान नहीं होगा।
.🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में

एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
चेहरे पर झलकता आक्रोश...

संत ने पूछा - बोलो बेटी क्या बात है?

बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है।
वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है।
यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि।

संत मुस्कुराए और कहा...

बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं।
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समाज में।

अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में।
एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी।
उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा।
क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी।

समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी प्रकार की है।
पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता।
बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में।

पूरी सभा में चुप्पी छा गई।
उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क।।।

आप सभी दोस्तों से मेरा
हाथ जोडकर निवेदन हैं कि ये मैसेज अपनी बेटी-बहन को अवश्य पढायें और सभी मित्र शेयर अवश्य करे...

ये सरकारी स्कूल में पढता है

गाँव के कुएँ पर 3 महिलाएँ पानी भर रही थीं।

तभी एक महिला का बेटा वहाँ से गुजरा।
उसकी माँ बोली---" वो देखो, मेरा बेटा,
                             इंग्लिश मीडियम में है। "

थोड़ी देर बाद दूसरी महिला का पुत्र गुजरा।
उसकी माँ बोली---" वो देखो मेरा बेटा,
                             सीबीएसई में है। "

तभी तीसरी महिला का पुत्र वहाँ से गुजरा,
दुसरे बेटों की तरह ही उसने भी अपनी माँ को देखा
और माँ के पास आया।
पानी से भरी गघरी उठाकर उसने अपने कंधे पर रखी,
दुसरे हाँथ में भरी हुई बाल्टी सम्हाली और
माँ से बोला---" चल माँ, घर चल। "

उसकी माँ बोली---" ये सरकारी स्कूल में पढता है। "
उस माँ के चेहरे का आनंद देख बाकी दूसरी
दो महिलाओं की नजरें झुक गईं।

उपरोक्त कथा का तात्पर्य सिर्फ यही है कि,
लाखों रुपए खर्च करके भी संस्कार नहीं खरीदे
जा सकते...!!

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एक छिपकली

अगर एक छिपकली ऐसा कर सकती है,
तो हम क्यों नहीं कर सकते ???
मुझे मिला अब तक का सबसे बेहतरीन मैसेज ...
ये जापान में घटी सच्ची घटना है।
जापान में एक व्यक्ति अपने घर को तोड़ कर
दोबारा बनवा रहा था।
जापान में घरों में लकड़ी की दीवारों में आमतौर
पर खाली जगह रहती है।
जब उस घर की दीवारों को तोड़ रहे थे तो उस
दीवार की खाली जगह में एक छिपकली फंसी
हुई मिली। उस छिपकली के पैर में दीवार के बाहर
की तरफ से निकल कर एक कील घुसी हुई थी।
जब उस छिपकली को देखा तो उस पर तरस तो
आया ही साथ ही एक जिज्ञासा भी हुई
क्योंकि जब कील को जांचा गया तो पता चला
कि ये कील मकान बनाते समय 5 वर्ष पहले
ठोकी गई थी।
क्या हुआ था?
छिपकली 5 वर्षों से एक ही जगह फंसी रहने के
बावजूद जिन्दा थी!!
दीवार के एक छोटे से अँधेरे हिस्से में बिना
हिले-डुले 5 वर्षों तक जिन्दा रहना असम्भव
था।
ये वाकई हैरानी की बात थी कि छिपकली 5
वर्षों से जिन्दा कैसे थी! वो भी बिना एक कदम
हिलाये, क्योंकि पैर दीवार से निकली कील में
फंसा हुआ था।
सो वहाँ काम रोक दिया गया और छिपकली को
देखने लगे कि वो क्या करती है और क्या और
कैसे खाती है।
थोड़ी देर बाद पता नहीं कहाँ से एक और
छिपकली आ गई जिसके मुंह में खाना था।
ये देख कर लोग हैरानी से सुन्न हो गये और ये
बात उनके दिल को छू गई।
जो छिपकली पैर में कील घुसी होने की वजह से
एक ही जगह फंस गई थी, दूसरी छिपकली
पिछले 5 वर्षों से उसका पेट भर रही थी!!!!
अद्भुत! एक छिपकली द्वारा अपने साथी के
प्रति बिना उम्मीद छोड़े ये सेवा पिछले 5 वर्षों
से लगातार बिना थके चल रही थी।
अब आप सोचिये कि एक नन्हा सा जीव जो
काम कर सकता है क्या कोई बुद्धिमान
व्यक्ति उस काम को नहीं कर सकता।
कृपया अपने प्रियजनों का परित्याग ना करें।
जब उन्हें आपकी जरूरत हो उस समय उन्हें यह
ना कहें कि आप व्यस्त हैं और आपके पास
उनके लिये समय नहीं है।
हो सकता है कि आपके कदमों तले सारी दुनिया
हो
लेकिन उनके लिये केवल आप ही उनकी दुनिया
हो
आपकी उपेक्षा का एक पल उनके दिल को तोड़
सकता है जो आपके दिल में बसते हैं।
कुछ कहने से पहले ये याद रखें कि कुछ तोड़ने में
केवल एक पल लगता है जबकि बनाने में पूरा
जीवन लग जाता है !!

बन्दर चाल

एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई| सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए|
उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा| जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी गिरा दिया गया और उसके साथ-साथ बाकी बंदरों पर भी पानी गिरा दिया गया| पानी डालने पर वह बन्दर भाग कर एक कोने में चला गया|
थोड़ी देर बाद एक दूसरा बन्दर सीढी के पास पहुंचा| वह जैसे ही सीढी के ऊपर चढ़ने लगा, फिर से बन्दर पर ठंडा पानी गिरा दिया गया और इसकी सजा बाकि बंदरों को भी मिली और साथ-साथ दूसरे बंदरो पर भी ठंडा पानी गिरा दिया गया | ठन्डे पानी के कारण सारे बन्दर भाग कर एक कोने में चले गए|
यह प्रक्रिया चलती रही और जैसे ही कोई बन्दर सीढी पर केले खाने के लिए चढ़ता, उस पर और साथ-साथ बाकि बंदरों को इसकी सजा मिलती और उन पर ठंडा पानी डाल दिया जाता|
बहुत बार ठन्डे पानी की सजा मिलने पर बन्दर समझ गए कि अगर कोई भी उस सीढी पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो इसकी सजा सभी को मिलेगी और उन सभी पर ठंडा पानी डाल दिया जाएगा|
अब जैसे ही कोई बन्दर सीढी के पास जाने की कोशिश करता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते और उसे सीढी के पास जाने से रोक देते|
थोड़ी देर बाद उस बड़े से पिंजरे में से एक बन्दर को निकाल दिया गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को डाला गया|
नए बन्दर की नजर केलों पर पड़ी| नया बन्दर वहां की परिस्थिति के बारे में नहीं जानता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ भागा| जैसे ही वह बन्दर उस सीढी की तरफ भागा, बाकि सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी|
नया बन्दर यह समझ नहीं पा रहा था कि उसकी पिटाई क्यों हुई | लेकिन जोरदार पिटाई से डरकर उसने केले खाने का विचार छोड़ दिया|
अब फिर एक पुराने बन्दर को उस पिंजरे से निकाला गया और उसकी जगह एक नए बन्दर को पिंजरे में डाला गया| नया बन्दर बेचारा वहां की परिस्थिति को नहीं जनता था इसलिए वह केले खाने के लिए सीढी की तरफ जाने लगा और यह देखकर बाकी सारे बंदरों ने उसकी पिटाई कर दी| पिटाई करने वालों में पिछली बार आया नया बन्दर भी शामिल था जबकि उसे यह भी नहीं पता था कि यह पिटाई क्यों हो रही है|
यह प्रक्रिया चलती रही और एक-एक करके पुराने बंदरों की जगह नए बंदरों को पिंजरे में डाला जाने लगा| जैसे ही कोई नया बन्दर पिंजरे में आता और केले खाने के लिए सीढी के पास जाने लगता तो बाकी सारे बन्दर उसकी पिटाई कर देते|
अब पिंजरे में सारे नए बन्दर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था| उनमें से किसी को यह नहीं पता था कि केले खाने के लिए सीढी के पास जाने वाले की पिटाई क्यों होती है लेकिन उन सबकी एक-एक बार पिटाई हो चुकी थी|
अब एक और बन्दर को पिंजरे में डाला गया और आश्चर्य कि फिर से वही हुआ| सारे बंदरों ने उस नए बन्दर को सीढी के पास जाने से रोक दिया और उसकी पिटाई कर दी जबकि पिटाई करने वालों में से किसी को भी यह नहीं पता था कि वह पिटाई क्यों कर रहे है|
हमारे जीवन भी ऐसा ही कुछ होता है| अन्धविश्वास और कुप्रथाओं का चलन भी कुछ इसी तरह होता है क्योंकि उन हम लोग प्रथाओं और रीति-रिवाजों के पीछे का कारण जाने बिना ही उनका पालन करते रहते है और नए कदम उठाने की हिम्मत कोई नहीं करता क्योंकि ऐसा करने पर समाज के विरोध करने का डर बना रहता है|
कोई भी कुछ नया करने की सोचता है तो उसे कहीं न कहीं लोगों के विरोध का सामना करना ही पड़ता है|
भारत की जनसँख्या 121 करोड़ से ऊपर है लेकिन भारत खेलों में बहुत पीछे है क्योंकि ज्यादातर अभिवावक अपने बच्चों को खेल के क्षेत्र में जाने से रोकते है क्योंकि बाकी सारा समाज भी ऐसा ही कर रहा है| उन्हें असफलता का डर लगा रहता है|
ये बड़ी अजीब बात है कि अभी हाल ही में उतरप्रदेश में चपरासी के सिर्फ 368 पदों के लिए 23 लाख आवेदन आए थे और उसमें से भी 1.5 लाख ग्रेजुएट्स, 25000 पोस्ट ग्रेजुएट्स थे और 250 आवेदक ऐसे थे जिन्होंने पीएचडी की हुई थी|
दूसरी तरफ भारत को आज भी विदेशों से लाखों करोड़ का सामान इम्पोर्ट करना पड़ता है और खेल जैसे क्षेत्र में भारत बहुत पीछे है|
संभावनाएं बहुत है लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि हम भीड़चाल में चलते है|
ये हमारी मानसिकता ही है जो हमें पीछे धकेल रही है| हम चाहें तो बन्दर की तरह लोगों की देखा देखी कर सकते या फिर खुद की स्वतन्त्र सोच के बल पर सफलता की सीढी चढ़ सकते है|

#hindi tadaka, #hinditadaka

Gautam budhha

एक आदमी ने भगवान बुद्ध से पुछा : जीवन का मूल्य क्या है?
बुद्ध ने उसे एक Stone दिया
और कहा : जा और इस stone का
मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान
रखना stone को बेचना नही है I
वह आदमी stone को बाजार मे एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है?
संतरे वाला चमकीले stone को देख
कर बोला, "12 संतरे लेजा और इसे
मुझे दे जा"
आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले stone को देखा और कहा
"एक बोरी आलू ले जा और
इस stone को मेरे पास छोड़ जा"
आगे एक सोना बेचने वाले के
पास गया उसे stone दिखाया सुनार
उस चमकीले stone को देखकर बोला, "50 लाख मे बेच दे" l
उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..
उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू
ने इसे बेचने से मना किया है l
आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे stone दिखाया l
जौहरी ने जब उस बेसकीमती रुबी को देखा , तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस बेसकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका l
फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेसकीमती रुबी? सारी कायनात , सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नही लगाई जा सकती
ये तो बेसकीमती है l"
वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे बुद्ध के पास आया l
अपनी आप बिती बताई और बोला
"अब बताओ भगवान ,
मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?
बुद्ध बोले :
संतरे वाले को दिखाया उसने इसकी कीमत "12 संतरे" की बताई l
सब्जी वाले के पास गया उसने
इसकी कीमत "1 बोरी आलू" बताई l
आगे सुनार ने "2 करोड़" बताई l
और
जौहरी ने इसे "बेसकीमती" बताया l
अब ऐसा ही मानवीय मूल्य का भी है l
तू बेशक हीरा है..!!
लेकिन,
सामने वाला तेरी कीमत,
अपनी औकात - अपनी जानकारी - अपनी हैसियत से लगाएगा।

Rishte

एक सेठ जी थे  -
जिनके पास काफी दौलत थी.
सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी.
परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया. 
जिससे सब धन समाप्त हो गया.

बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो,
मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो?

सेठ जी कहते कि
"जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे..."

एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया.
सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये...

यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये...

दामाद लड्डू लेकर घर से चला,
दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया.

उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे...मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया. 

सेठ जी लड्डू लेकर घर आये.. सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोडकर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया.
सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली...

सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा...
देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में...

इसलिये कहते हैं कि भाग्य से
ज्यादा
और...
समय
से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा!ईसी लिये ईशवर जितना दे उसी मै संतोष करो...
झूला जितना पीछे जाता है, उतना ही आगे आता है।एकदम बराबर।
सुख और दुख दोनों ही जीवन में बराबर आते हैं।

जिंदगी का झूला पीछे जाए, तो डरो मत, वह आगे भी आएगा।

बहुत ही खूबसूरत लाईनें.

.किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!

डरिये वक़्त की मार से,बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!

अकल कितनी भी तेज ह़ो,नसीब के बिना नही जीत सकती..!
बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,कभी बादशाह नही बन सका...!!

""ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है!

इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से!

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है !!! "☝☝☝